Tuesday, November 13, 2012

Non Resident Biharis in Singapore celebrated Diwali

BIJHAR, the cultural society of people from Bihar and Jharkhand celebrated the festival of light “Deep Utsav 2012” on Sunday evening at Goldkist Beach Resort on the East Coast Parkway, Singapore.

The event witnessed a turnout of more than 300 members and guests. Deputy High commissioner of Indiain Singapore, Mr. Tsewang Namgyal was the Guest of Honour. The event kicked off after Mr. Namgyal lit the traditional Lamp. In his speech he expressed his happiness to note the impressive progress made by BIJHAR year after year. He also underscored BIJHAR's commendable efforts in reaching out to the needy and underprivileged both in Singapore and India.  
BIJHAR President Prakash K Hetamsaria in his speech mentioned about BIJHAR's committments towards social engagements highlighting activities such as blood donation campaigns, visits to the homes for the handicapped, knowledge sharing sessions, sports events, pranayam classes etc. apart from celebration of various festivals such as Makar Sankranti, Holi, Saawan Utsav and Dandiya with members and friends. He also highlighted some impressive activities about working closely with National Integration Council and other societies in Singapore for racial harmony and integration for new citizens and immigrants.

The highlights of the evening included Ganesh Vandana, a play from the epic Ramayan scripted and directed by BIJHAR's life trustee and co-founder Rajesh Anand, dances on Bollywood numbers by BIJHAR members and a group of Japanese women and some soul-stirring Bhojpuri songs by BIJHAR members. However, the show stealer this year was a unique fashion parade conceptualised by BIJHAR member Tulika Singh that won everyone's heart for its novelty, theme, costumes and execution. The role of Narad Muni enacted by Nishant Kumar also deserves special mention for the justice that he brought out in his histrionics.
As usual, the Jam session continued almost until midnight over an eclectic mix of Hindi, Bhojpuri and Punjabi hits.
The food this year was catered by Tandoor Kitchen and comprised of tasty delicacies including Jalebis and Rabri.

Article Courtesy - Sri Rajesh Anand, Singapore

Friday, October 5, 2012

Pratyay Amrit gets 'Bihar Pride Award' 2012

Bihar Foundation Australia Chapter (BFAC) has conferred the first Bihar Pride Award 2012 (BPA) to Shri Pratyaya Amrit, Secretary, Road Construction Dept. for his outstanding contribution in development of Bihar.

Bihar Pride Award has been instituted by Bihar Foundation Australia Chapter and is conferred to those individual who does outstanding work in development of Bihar. 'We strongly believe that Shri Amrit truly deserves this recognition as he has shown that with sheer determination, sincerity, commitment and hard work one can make so much difference in the society. With his outstanding work and leadership, he has not only inspired the people of Bihar but many more across the globe also' – said Amit Das, Secretary, Bihar Foundation Australia Chapter. He added - It is our social responsibility to encourage, promote and recognize those individuals who make us feel proud of being Bihari.

'We are thankful to Shri Pratyaya Amrit, IAS who came to Sydney to receive this honor and personally inspired the Bihar community by spending some valuable time with us. It was indeed a great moment for all of us'- said Mr. Shekhar Kishore. All the prominent NRI/NRB and executive committee members of Bihar Foundation Australia Chapter were present on the occasion. While interacting with NRB in Australia Shri Pratyaya Amrit talked about ongoing development work and changed scenario in Bihar. He said that hard work is continued under dynamic political leadership to bring prosperity and development to Bihar. He also highlighted many positive initiatives recently taken by the government. Response of NRB/NRI was overwhelming about positive changes in Bihar. Everyone said in one voice that they feel proud to be Bihari and also want to contribute in the development of Bihar in whatever way they could. While some were interested in doing work in education sector others were interested in disabled community service, health care. At the same time NRB also shared the works of BFAC.  Shri Amrit was overwhelmed to know about the ongoing establishment of an international level Engineering College in Forbesganj by Shri Amit Das and also praised the efforts of other NRB in Australia. He promised to give full support to the NRB if they want to contribute in the development of Bihar.
The program was well managed and coordinated under the young and dynamic leadership of NRI Shri Amit Kumar Das, Secretary, Bihar Foundation Australia Chapter. 'We thank the Govt. for establishing 'Bihar State Industrial Investment Advisory Council'. I hope the council would develop a mechanism for tracking the investment. I would also thank Bihar Foundation Team at Patna for continuous support and encouragement which further motivate us and give us strength to move forward in building a brand Bihar over here' said Amit Das.

Saturday, April 21, 2012

अपर्णा : सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग से निकलती वतन लौटने की राह

View of a block of the building coming under APARNA
बात सन 2009 की है। मुंबई के धारावी में बिहारी मूल के लोगों के एक संगठन अंजुमन-ए-बाशिंदगाने-बिहार के कार्यालय में अहसान हुसैन, अनवर कमाल, मुखियाजी एवम अन्य लोगों से मुलाक़ात होती है। मुखियाजी कभी बिहार में मुखिया हुआ करते थे। रोजी-रोटी की तलाश में मुम्बई आना पड़ा, पर तमाम दिक्कतों के बाद भी सामाजिक कार्य करने की आदत नहीं छूटी। शायद इसीलिए आज भी लोग उन्हे उनके नाम की बजाय मुखियाजी ही बुलाते हैं। वहीं हुई मुलाक़ात में कई लोग अपनी दुकान पे आने का न्योता देते है। अहसान हुसैन एवम अनवर कमाल के साथ मैं निकाल जाता हूँ कुछ लोगों से मिलने के लिए। लेदर की एक दुकान में अहमद भाई अपने बनाए जैकेट दिखाते हैं। एक एल्बम दिखाते हैं जिसमें जैकेट के कई डिज़ाइन हैं। बड़े ही गर्व से ताते हैं कि यह डिज़ाइन अक्षय कुमार के लिए बनाया था, फलां फिल्म के लिए। बातों में पता चलता है कि धारावी में लेदर के काम में बिहार के काफी लोग लगे हुए हैं। कई लोगों ने तो मेहनत कर के काफी अच्छा स्थान बना लिया है, पर कई लोग ऐसे भी हैं जो अभी भी संघर्ष कर रहे हैं। उनकी हालत अच्छी नहीं है। बातों-बातों में उनसे पूछा कि यही काम आपलोग बिहार में क्यूँ नहीं करते। तो जवाब था कि अगर सरकार सुविधा दे तो वहाँ भी कर सकते हैं। कौन अपने घर परिवार, अपनी ज़मीन से दूर रहना चाहता है। इस बात में उम्मीद की एक किरण दिखाई दी।
कुछ समय के बा बिहार फ़ाउंडेशन के मुंबई चैप्टर के औपचारिक उदघाटन का कार्यक्रम तय हुआ। इस उदघाटन कार्यक्रम के दौरान कुछ लघु एवम मध्यम उद्यमियों की एक बैठक माननीय उप-मुख्यमंत्री महोदय के साथ तय हुई। श्री टी0 वी0 सिन्हा जो मुंबई चैप्टर के उपाध्यक्ष भी हैं, की तैयारियों और सटीक प्रेजेंटेशन के कारण बैठक सफल रही। श्री सुशील कुमार मोदी, माननीय उप-मुख्यमंत्री बिहार ने लोगों को हर संभव मदद का भरोसा दिया, जिसके फलस्वरूप लोगों ने प्रयास शुरू किया। एक नए आइडिया का जन्म हो चुका था, बस जरूरत थी तो उसे मूर्त रूप देने की।
अहसान हुसैन ने तमाम छोटे-बड़े उद्यमियों के घर जा-जा कर उनसे बात की। इसी क्रम में ज़री के काम में लगे इफ़्तेखर अहमद से मुलाक़ात हुई। इस क्षेत्र में भी बिहार के काफी लोग काम कर रहे थे। ज़्यादातर कारीगर। इफ़्तेखर अहमद ने ज़री के काम में लगे बिहारी लोगों को संगठित किया। इस तरह धीरे-धीरे कर के लगभग 150 लोग जुड़ गए, इस प्रयास से। सबों ने हस्ताक्षर कर के बिहार फ़ाउंडेशन मुंबई चैप्टर को अपना प्रस्ताव दिया। कोई पाँच लाख तो कोई 50 लाख तो कोई उस से भी ज्यादा का निवेश करना चाहता था बिहार में। इस तरह कुल मिलकर समेकित निवेश लगभग 30 करोड़ का हो गया। अब प्रश्न था इस प्रयास के लिए एक जगह का जहां ये लोग अपनी यूनिट को स्थापित कर सकें। सर्वप्रथम इसके लिए कंपनी एक्ट के सेक्शन 25 के तहत एक नॉन-प्रॉफ़िट कंपनी के रूप में रजिस्ट्रेशन कराया गया, जिसका नाम रखा गया APARNA, यानि Association Of Progressive And Resurgent Nationalist Awamलोगों ने श्री अहसान हुसैन को इस कंपनी के डाइरेक्टर की ज़िम्मेदारी सौंपी। एसी के कारोबार से जुड़े श्री हुसैन पिछले 15 सालों से धारावी में बिहारियों के लिए सामाजिक कार्य में सक्रिय रहे हैं। और संभवतः इसी कारण लोगों ने उनपर अपना भरोसा दिखाया। इसके बाद बियाडा में ज़मीन के लिए आवेदन किया गया। बियाडा की तरफ से पटना के फतुहा में ज़मीन आवंटित की गयी।
आम तौर पर स्टील या एस्बेस्टस की चादरों से बड़ी-बड़ी शेड बना कर कारख़ाना लगाया जाता है। पर यह एक अलग मोडेल था। उसके लिए एक बहुमंज़िली इमारत बनाने की परिकल्पना की गयी, जिसमें सभी अपनी आवश्यकता के अनुसार जगह ले सकें ठीक वैसे ही जैसे मुंबई में गाला डालकर काम करते हैं लोग। कोई पाँच सौ वर्गफीट तो कोई एक हज़ार तो कोई पाँच हज़ार। जिसकी जितनी जरूरत। और इस इमारत का डिज़ाइन तैयार किया देश के जाने माने आर्किटेक्ट श्री हाफिज़ कौनट्रैक्टर ने। इस औद्योगिक संकुल में ना सिर्फ निर्माण कार्य की सुविधा होगी बल्कि अन्य मूलभूत सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी। एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, एक पोस्ट ऑफिस, एक एटीएम और बैंक की सुविधा रखे जाने का प्रस्ताव है। अगर सब कुछ ठीक रहा तो अगले फेज़ में एक प्राथमिक स्कूल की सुविधा भी विकसित की जाएगी वहाँ।
24 अप्रैल 2012 को अक्षय त्रित्या के पावन अवसर पर इस भवन के निर्माण कार्य का भूमि पूजन और शिलान्यास का कार्यक्रम है। बिहार फ़ाउंडेशन के प्रयास से एक और सपना सच होने वाला है। अभी वर्तमान में अपर्णा के प्रथम चरण में 350 उद्यमी और लगभग 4000 बिहारी मजदूर अपने वतन वापस आ रहे हैं, जो मुख्यतः सॉफ्ट लगेज एवम चमड़े से जुड़ी सामग्रियों का निर्माण करेंगे। प्रथम चरण में तीन टावरों का निर्माण होगा जिसका नाम भी बिहार की धरती के कर्मयोधाओं के नाम पर क्रमशः चन्द्रगुप्त, अशोक और शेरशाह रखा जाएगा। अब कुल निवेश 250 करोड़ से ज्यादा का हो गया है और इससे सीधे लगभग दस हज़ार लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है। यह सिर्फ भावुक प्रयास ही नहीं बल्कि पूर्णतः आर्थिक भी है। सूक्षम, लघु और मध्यम स्तर के अनेक निवेशकों के मिलने से समेकित रूप से एक बड़ा निवेश हो पा रहा है। यह वह क्षेत्र है जिसमें अपार संभावनाएं हैं। रोजगार के अवसर ज्यादा हैं। कई विकसित देशों ने इस मॉडेल पर काम करके विकास की राह पकड़ी है। आज बिहार की जो स्थिति है उसके अनुसार सूक्षम, लघु और मध्यम स्तर के उद्योगों से विकास की राह पर कदम रखा जा सकता है। कई लोगों को रोजगार मिल सकता है। गाँवों के छोटे-छोटे घरेलू उद्यमों को बाज़ार मिल सकता है।
आज पटना में जिस हिसाब से ज़मीन की कमी दिख रही है। उस हिसाब से हॉरिजॉन्टल ना बढ़ कर वर्टिकल बढ़ना भविष्य के लिए एक मॉडेल होगा। अपर्णा संप्रति अपने आप में पहला ऐसा प्रयास है, जो  बहुतेरे लोगों को एक छाते के नीचे लाने के लिए एक उदाहरण होगा। प्रवासी लोगों के रिवरस माईग्रेशन के लिए एक मॉडेल होगा अपर्णा। साथ ही यह भी उम्मीद है कि जब यह बिल्डिंग बन कर तैयार होगी तो जिस तरह लोग ताजमहल या गोलघर को देखने आते हैं, उसी तरह इस बिल्डिंग को भी देखने आएंगे। अपनी ज़मीन से जुडने और उसे समृद्ध बनाने हेतु लोगों का समेकित प्रयास जो है यह।

Tuesday, February 14, 2012

ग्लोबल बिहार समिट 2012

दूसरा ग्लोबल बिहार समिट 17 से 19 फ़रवरी 2012 को पटना में होने जा रहा है। ऐसी उम्मीद है कि यह पिछले बार के ग्लोबल समिट से कई मायनों में एक कदम आगे होगा। इसमें आने वाले लोग न सिर्फ अपनी दक्षता से विभ्भिन क्षेत्रों में बिहार के विकास की रूप रेखा की चर्चा करेंगे, बल्कि किस तरह से सरकार, यहाँ के नागरिक, प्रवासी बिहारी और विशेषज्ञ अपने-अपने स्तर से उसमें योगदान दे सकते हैं; किस तरह से सबके साझा योगदान से राज्य को और आगे ले जाया जा सकता है, एक विकसित राज्य बनाया जा सकता है, की भी चर्चा की जाएगी।
       अगर आपको याद हो तो जिस समय पिछला ग्लोबल समिट हुआ था उस वक़्त बिहार ने विकास के पथ पर कदम ही रखा था। वो बिहार जो कभी हर क्षेत्र में पथ प्रदर्शक हुआ करता था वह बिहार अपनी पहचान के संकट से गुजर रहा था। बाहर रहने वाले बिहारी खुद की पहचान बताने से कतराते थे। 2007 की उस जनवरी में देश-विदेश के कई गणमान्य लोग जुटे और किस तरह से बिहार को रास्ते पर लाया जाए इसकी चर्चा की गयी। उस चर्चा के आधार पर विभ्भिन क्षेत्रों में कार्य-योजना बनाई गयी या कार्य-योजना बनाने का मार्ग प्रशस्त हुआ। लोगों ने विशेषज्ञों के नज़रिये से भी सोंचना शुरू किया। इसके बाद एक और साकारात्मक चीज़ देखने को मिली वो यह थी कि बाहरी लोगों ने बिहार को साकारात्मक तरीके से देखना शुरू किया। आज बिहार प्रगति की राह पर चल रहा है। कई कदम आगे बढ़ चुका है, पर अभी भी काफी लंबा रास्ता तय करना बाकी है। ऐसे में बिहार को अब प्रगति की रफ्तार को और तेज़ करने की आवश्यकता महसूस हुई। इसी को ध्यान में रखकर बिहार की स्थापना के सौ वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में दूसरा ग्लोबल समिट आयोजित किया जा रहा है।
      तीन दिनों तक चलने वाले इस समिट का उदघाटन 17 फ़रवरी को नेपाल के प्रधानमंत्री श्री बाबू राम भट्टराई के द्वारा माननीय मुख्यमंत्री श्री नीतिश कुमार एवम माननीय उप-मुख्यमंत्री श्री सुशील कुमार मोदी की उपस्थिति में किया जाएगा। उसी दिन प्रथम प्लेनरी सत्र रखा गया है जिसकी अध्यक्षता राज्यसभा सदस्य श्री एन0के0सिंह के द्वारा की जाएगी। इस प्लेनरी का विषय "कम विकसित क्षेत्रों को समग्र विकास की मुख्यधारा में लाने हेतु कार्य योजना" है और इस सत्र में रिजर्व बैंक के गवर्नर श्री डी0 सुबबराओ, लंदन स्कूल ऑफ इक्नोमिक्स के लॉर्ड निकोलस स्टर्न एवं योजना आयोग के उपाध्यक्ष श्री मोंटेक सिंह अहलूवालिया भी अपने विचारों से लोगों को अवगत करायेँगे। संध्या में आगंतुकों हेतु एक सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया है, जिसमें बिहार के लोक गीत और लोक नृत्य की प्रस्तुति की जाएगी। इसमें बिहार के लोक संगीत में प्रयोग में आने वाले विभ्भिन वाद्य यंत्रों पर आधारित एक प्रस्तुति भी रखी गयी है। साथ ही बिहार के गौरव को प्रदर्शित करती बिहार गौरव गान को प्रस्तुत किया जाएगा।
            इस समिट में कुल 6 प्लेनरी एवं 11 पैरलल सेशन रखे गए हैं जो शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण, औद्योगिक विकास, आधारभूत संरचना विकास, कृषि विकास, शहरी विकास, पर्यटन विकास, उद्यमिता विकास, समग्र विकास, सांस्कृतिक पुनर्जागरण इत्यादि थीम पर आधारित हैं। 18 देशों से लगभग 1000 प्रतिनिधियों के भाग लेने की संभावना है।
      यह प्रवासी बिहारियों और बिहार के शुभचिंतकों का समागम है, जो एक ऐसा मंच प्रदान करता है जिसमें अपने क्षेत्र के दिग्गज, सरकार के प्रतिनिधि, और बिहार में काम करने वाले एक साथ आकार अपने विचार, योजना और अनुभव से कुछ ऐसा निचोड़ सकें जिससे बिहार को तीव्र गति से विकास की धारा में लाया जा सके। आज सरकार की तरफ से इक्षाशक्ति है, बिहार के लोगों की तरफ से सापेक्ष सहयोग मिल रहा है, प्रवासी बिहारी भी अपने स्तर से प्रयास कर रहे हैं। ऐसे में जरूरत है सिर्फ इस बात कि एक फुलप्रूफ कार्य-योजना बनाई जाये जिस पर बिहार आगे बढ़े। जब हर नज़रिये से बातें सामने आएंगी तो निश्चित रूप से मंथन के बाद निचोड़ अमृत ही निकलेगा। बलते बिहार पर आयोजित यह वैश्विक सम्मेलन एक प्रयास है – सबों को साथ लाने का, मिल कर कम करने का। तो आइये, इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बनें और अपने स्तर से बिहार के विकास में योगदान दें।